देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बाजपुर, ऊधम सिंह नगर में एक अवैध SIM Box टेलीकॉम गेटवे का भंडाफोड़ किया है। यह राज्य में इस तरह के अवैध टेलीकॉम गेटवे का पहला मामला है, जहां विदेशी और VoIP कॉल्स को भारतीय लोकल नंबर में बदलकर पहचान छिपाने का खेल चल रहा था।
बड़ी कार्रवाई: 114 सिम कार्ड, 77 एंटीना और उपकरण बरामद
STF की साइबर कुमाऊं यूनिट ने 22 सितंबर 2026 को बाजपुर के मुडिया, ईदगाह के पास स्थित एक मकान पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान कादिर पुत्र जाबिर अली (24 वर्ष), निवासी मिलक जुम्मावाली, ग्राम बेरखेड़ा चक, थाना भगतपुर, जनपद मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश को गिरफ्तार किया गया। मौके से 02 SIM Box (32 स्लॉट), 77 एंटीना, 114 एयरटेल सिम कार्ड, एक एयरटेल इंटरनेट राउटर, सैमसंग A35 मोबाइल, LAN/USB केबल, पावर केबल, फाइबर वायर, मीडिया कन्वर्टर और अन्य टेलीकॉम उपकरण बरामद किए गए।
बांग्लादेश कनेक्शन: 7 महीने से चल रहा था अवैध धंधा
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी लगभग 7 महीने से इस अवैध गेटवे को संचालित कर रहा था। प्रारंभिक जांच में आरोपी का संपर्क बांग्लादेश के साइबर अपराधियों से होना और उनके माध्यम से आर्थिक लाभ प्राप्त करना सामने आया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने बताया कि SIM Box उसे बांग्लादेश के साइबर अपराधियों द्वारा कूरियर के जरिए भेजे गए थे।
कैसे चलता था धंधा? विदेशी कॉल बन जाती थीं ‘लोकल’
जांच में सामने आया कि SIM Box के माध्यम से विदेशी और इंटरनेट (VoIP) कॉल्स को भारतीय लोकल मोबाइल कॉल्स में परिवर्तित किया जा रहा था। इसके कारण कॉल प्राप्त करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर विदेशी नंबर के स्थान पर भारतीय मोबाइल नंबर दिखाई देता था, जिससे कॉल करने वाले की वास्तविक पहचान और लोकेशन छिपाने में मदद मिलती थी। अवैध गेटवे में अलग-अलग व्यक्तियों की आईडी का दुरुपयोग कर प्राप्त किए गए सिम कार्डों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
पुराना रिकॉर्ड: 2023 में भी हो चुका है गिरफ्तार
अभियुक्त का आपराधिक इतिहास रहा है। वह वर्ष 2023 में थाना कटघर, जनपद मुरादाबाद से SIM Box के माध्यम से अवैध टेलीकॉम गेटवे संचालित करने के मामले में गिरफ्तार हो चुका है और वर्तमान में जमानत पर है। उसके खिलाफ FIR No. 250/2023 (धारा 420, 467, 468, 471 भादवि एवं धारा 4, 20, 21, 25 भारतीय तार अधिनियम, 1885) और FIR No. 541/2023 (धारा 2/3 गैंगस्टर अधिनियम) दर्ज हैं।

‘ऑपरेशन हॉट स्पॉट’ के तहत लगातार कार्रवाई जारी
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ‘साइबर अपराध मुक्त उत्तराखंड’ के संकल्प और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के दिशा-निर्देशन में चल रहे ‘ऑपरेशन हॉट स्पॉट’ अभियान के अंतर्गत की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF ने कहा कि SIM Box जैसी तकनीक के माध्यम से पहचान छिपाने का प्रयास करने वाले साइबर अपराधियों के विरुद्ध STF द्वारा आधुनिक साइबर फॉरेंसिक एवं तकनीकी संसाधनों की सहायता से प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों पर सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंटों एवं नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।[4][5]
STF टीम का योगदान
इस कार्रवाई में निरीक्षक अरुण कुमार, निरीक्षक एम.पी. सिंह, उपनिरीक्षक शंकर सिंह रावत, उपनिरीक्षक अशोक कांडपाल, उपनिरीक्षक प्रकाश भगत, अपर उपनिरीक्षक सत्येन्द्र गंगोला, हेड कांस्टेबल गोविंद सिंह, हेड कांस्टेबल मोहित वर्मा, हेड कांस्टेबल मनोज कुमार, कांस्टेबल मुहम्मद उस्मान, कांस्टेबल प्रवीण आगरी और कांस्टेबल गुरवंत सिंह शामिल थे।
साइबर अपराध में SIM Box का खतरनाक इस्तेमाल
विशेषज्ञों के अनुसार, SIM Box का इस्तेमाल निम्नलिखित साइबर अपराधों में किया जाता है:
– विदेशी/VoIP कॉल्स को भारतीय लोकल नंबर के रूप में प्रदर्शित करना
– कॉलर की वास्तविक पहचान एवं लोकेशन छिपाने का प्रयास करना
– फर्जी/दूसरों के दस्तावेजों पर जारी सिम कार्डों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल
– डिजिटल अरेस्ट, फर्जी अधिकारी बनकर ठगी एवं अन्य साइबर अपराधों में उपयोग
– अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज के माध्यम से सरकारी राजस्व एवं टेलीकॉम कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाना।
STF द्वारा अभियुक्त के साइबर नेटवर्क, विदेशी संपर्क, बैंक खातों एवं अन्य सहयोगियों के संबंध में गहनता से जांच की जा रही है।


