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    Home»उत्तराखंड»उत्तराखंड में मदरसों में अब शुक्रवार के बजाय रविवार को होगी छुट्टी, मान्यता और शिक्षा व्यवस्था के नियम होंगे सख्त
    उत्तराखंड देहरादून

    उत्तराखंड में मदरसों में अब शुक्रवार के बजाय रविवार को होगी छुट्टी, मान्यता और शिक्षा व्यवस्था के नियम होंगे सख्त

    Aarogya GangaBy Aarogya GangaOctober 21, 2026No Comments4 Mins Read
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    देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव किया जा रहा है। शिक्षा विभाग से स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त सभी शिक्षण संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक नियमों और मानकों का पालन करना होगा। इसके साथ ही मदरसों की मान्यता, पाठ्यक्रम और संचालन व्यवस्था को लेकर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।

    अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, जिन संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता मिली है, उन्हें शिक्षा विभाग के नियमों के अनुरूप संचालित होना होगा। इसी व्यवस्था के तहत साप्ताहिक अवकाश रविवार को रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    मदरसों में अब रविवार को होगा साप्ताहिक अवकाश

    उत्तराखंड में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों को सामान्य स्कूलों की व्यवस्था के अनुरूप संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में एक समान शैक्षिक व्यवस्था लागू करना और नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करना है।

    सरकार का रुख है कि स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त संस्थानों को निर्धारित पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियों और अन्य नियमों का पालन करना होगा। हालांकि, संबंधित संस्थानों पर लागू आदेशों और मान्यता की शर्तों के अनुसार व्यवस्था का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

    मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड की व्यवस्था

    प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा व्यवस्था को नए ढांचे में लाने के लिए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड की व्यवस्था लागू की गई है। इस व्यवस्था के दायरे में मुस्लिम समुदाय के साथ सिख, पारसी, जैन और बौद्ध समुदायों के शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है।

    नई व्यवस्था के तहत संस्थानों की मान्यता, निर्धारित पाठ्यक्रम और नियमित स्कूली शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। संबंधित संस्थानों को निर्धारित प्रक्रियाएं पूरी करने के साथ ही शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के नियमों के अनुरूप संचालन करना होगा।

    उत्तराखंड में 76 मदरसों को स्कूल के रूप में मिली मान्यता

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में पहले मदरसा बोर्ड से 452 संस्थान मान्यता प्राप्त थे। नई व्यवस्था के तहत दोबारा आवेदन करने वाले संस्थानों में से 76 को स्कूल के रूप में मान्यता मिल चुकी है, जबकि 114 आवेदन शिक्षा विभाग में लंबित बताए गए हैं।

    जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून में 41 संस्थानों में से छह, हरिद्वार में 270 में से 44, नैनीताल में 18 में से दो और ऊधम सिंह नगर में 119 में से 24 संस्थानों को मान्यता मिली है।

    इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि संस्थानों को नए ढांचे के तहत मान्यता दिलाने की प्रक्रिया जारी है। जिन संस्थानों के आवेदन लंबित हैं, उन्हें संबंधित विभाग की निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    बिना मान्यता संचालित संस्थानों पर कार्रवाई

    अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार, सरकार ने पहले चरण में 250 अवैध मदरसों को सील किया था। बताया गया कि ये संस्थान मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं थे। कुछ संस्थानों में दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

    सरकार का कहना है कि आवश्यक अनुमति और मान्यता के बिना संस्थानों का संचालन निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों में संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का जोर सभी शिक्षण संस्थानों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर है।

    नियमित स्कूली शिक्षा पर सरकार का जोर

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षण संस्थानों में निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुपालन पर जोर दे रही है। सरकार की नीति के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों को निर्धारित पाठ्यक्रम और शिक्षा विभाग के नियमों के अनुरूप संचालित करने की व्यवस्था की जा रही है।

    मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे इन बदलावों के तहत साप्ताहिक अवकाश, मान्यता प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और संस्थानों की निगरानी प्रमुख मुद्दे हैं। आने वाले समय में मान्यता प्रक्रिया पूरी करने और निर्धारित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान रहेगा।

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