इमिग्रेशन और विदेशी नौकरी के प्रति जागरूकता मुहिम
(ऊना से संदीप खड़वाल)
हिमाचल प्रदेश। कबूतरबाजी का खेल उत्तर भारत में एक ऐसा खतरनाक दलदल बना हुआ है, जिसमें युवा पीढ़ी बड़ी संख्या में धंसी हुई है।कबूतरबाजी आसान भाषा में उस खेल का नाम है, जिसमें युवाओं को स्वप्न दिखाकर विदेश नौकरी के नाम पर ठगा जाता है। जानकार बताते हैं कि इस खेल में कुछ भाग्यशाली लोग ही होते हैं जिन्हें वास्तव में विदेश में नौकरी मिलती है, लेकिन उन वास्तविक लोगों की आड़ में बड़ी संख्या में ऐसी युवा पीढ़ी होती है जिन्हें सपने ही बेचे जाते हैं और उन्हें विदेश नौकरी के नाम पर ठगा जाता है।
कई बार उन्हें विदेश में वह नौकरी नहीं मिलती जो उन्हें तथाकथित एजेंट द्वारा यहां बताई जाती है, तो कई बार उन्हें वह वेतन भत्ता नहीं मिलता जो उन्हें बताया जाता है। यहां तक कि कई बार युवा पीढ़ी को एक देश बताकर दूसरे देश भेज दिया जाता है। यही नहीं इन नौकरियों के लिए तथाकथित एजेंटों द्वारा भारी भरकम पैसा यहां भारत में तो लिया ही जाता है, बल्कि विदेशों में भी कुछ तथाकथित एजेंटों के लोगों द्वारा अतिरिक्त पैसा लिया जाता है। अकेले ऊना जिले में पिछले वर्ष कबूतरबाजी की लगभग 40 शिकायतें पुलिस को मिली हैं।
कुछ सामाजिक संगठन भी विदेश नौकरी में ठगी के विरुद्ध पीड़ितों की आवाज बनकर खड़े हुए हैं। यह संगठन भी पुलिस की जागरूकता मुहिम में साथ दे रहे हैं। बड़ी संख्या में पीड़ित भी इन संगठनों के पास अपना दुःख दर्द लेकर पहुंचते हैं। इन संगठनों के पास भी पीड़ितों की शिकायतों का बड़ा पुलिंदा है। ऊना पुलिस इमिग्रेशन पीड़ितों का दर्द समझती है और इस समस्या को एक बड़ा विषय मानती है।
इसी को देखते और समझते हुए जिले के पुलिस कप्तान अमित यादव स्वयं इसके विरुद्ध एक जागरूकता मुहिम के पक्षधर बने। अपनी मुहिम के तहत उन्होंने एक विशेष बातचीत में कहा कि लोगों को इमिग्रेशन, विदेश में नौकरी से संबंधित जरूरी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि ऊना जिले में केवल पांच एजेंट ही इमिग्रेशन और विदेश में नौकरी के लिए व्यक्तियों को भेजने के लिए केंद्रीय मंत्रालय द्वारा अधिकृत हैं, जबकि अधिकृत एजेंट भी पंजीकृत पते के अतिरिक्त कहीं अन्य ब्रांच तक नहीं खोल सकते हैं।
अमित यादव ने नियमों का हवाला देते हुए यह भी जानकारी दी कि टूर एंड ट्रैवल का कार्य करने वाले एजेंट किसी भी प्रकार से इमिग्रेशन या विदेश में नौकरी भेजने का काम भी नहीं कर सकते हैं। पुलिस ने लोगों से इसका ध्यान रखकर ही अपने कार्य किए जाने का आह्वान किया है। पुलिस कप्तान अमित यादव कहते हैं कि पुलिस अब टूर एंड ट्रैवल का कार्य करने वाले एजेंटो के डिस्पले बोर्ड्स पर यह लिखवाने की दिशा में भी काम कर रही है। जिसके तहत इनके डिस्प्ले पर ” यहां इमिग्रेशन विदेश नौकरी का काम नहीं किया जाता है “, यह लिखा जाएगा। जल्द ही पुलिस इसे अंतिम रूप देगी।
पुलिस की इस मुहिम से केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ एक्टरनल अफेयर द्वारा पंजीकृत एजेंट भी प्रसन्न हैं और वो इसे एक अच्छी शुरुआत मानते हैं। पंजीकृत एजेंट विशाल पुरी और एस भुल्लर बताते हैं कि गैर पंजीकृत या तथाकथित फर्जी एजेंट द्वारा किए गए धोखों का उन्हें भी नुकसान होता है क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र का नाम खराब होता है और सभी बदनाम होते हैं। उन्होंने बताया कि मंत्रालय द्वारा दो प्रकार के लाइसेंस दिए जाते हैं, जिनकी फीस 8 और 40 लाख होती है, जिसके तहत उन्हें क्रमशः 100 और 1000 लोग विदेश नौकरी भेजने के लिए अधिकृत किए जाते हैं। यह संख्या पूरी करने के बाद और संख्या स्वीकृत कराने के लिए दोबारा फीस देनी होती है। जबकि कार्यालय के लिए भी नियम होते हैं। यही फीस बचाने और अन्य ज़रूरी दस्तावेजों नियमों से बचने के लिए फर्जी एजेंट गैर पंजीकृत रूप से काम करते हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस की यह मुहिम क्या रंग दिखाती है और लोग इस जागरूकता से कितने जागरूक होते हैं।

