गणेश गोदियाल और करण मेहरा ने भाजपा पर साधा निशाना, हरीश रावत ने इस्तीफे की खबरों को बताया गलत
देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तत्कालीन निजी सहायक (पीए) चंदन सिंह जीना के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा ने कार्रवाई को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ हरीश रावत के साथ खड़ी है।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि जिस भर्ती मामले को लेकर कार्रवाई की जा रही है, वह करीब दस साल पुराना है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने मामले में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए संबंधित परीक्षा को निरस्त कराया था और जांच के आदेश दिए थे। साथ ही जांच का दायरा भी बढ़ाया गया था।
गोदियाल ने सवाल उठाया कि यदि केंद्र सरकार और ED को इस मामले में कार्रवाई करनी थी तो पिछले दस वर्षों में कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने के साथ ही हरीश रावत के एक पूर्व सहयोगी के यहां ED की कार्रवाई की गई और इसके जरिए मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयानों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ED की कार्रवाई को भाजपा द्वारा राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। गोदियाल ने कहा कि ED और भाजपा आपस में मिलकर कांग्रेस को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश की जनता अब इन हथकंडों को समझ चुकी है।

‘चुनाव तक कई नेताओं पर बना रहेगा ED का प्रकोप’
गणेश गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए जिस तरह अपने दायित्व का निर्वहन किया, वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है। उन्होंने कहा कि चुनाव तक राज्य के कई नेताओं पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई का दबाव देखने को मिल सकता है।
गोदियाल ने अपने ऊपर पूर्व में आयकर और GST नोटिस आने का भी जिक्र किया और कहा कि चुनाव के समय इस तरह की कार्रवाई और नोटिसों के जरिए विपक्ष को दबाने की कोशिश की जाती है। हालांकि उन्होंने दावा किया कि जनता अब ऐसे प्रयासों के झांसे में आने वाली नहीं है।
हरीश रावत के इस्तीफे पर गोदियाल ने दी सफाई
हरीश रावत के पार्टी से इस्तीफा देने की चर्चाओं पर गणेश गोदियाल ने कहा कि उनके बयान को सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि हरीश रावत ने कांग्रेस की सदस्यता छोड़ने की बात नहीं कही है। रावत ने केवल यह कहा है कि यदि ED की कार्रवाई से कांग्रेस के भ्रष्टाचार विरोधी नैरेटिव पर असर पड़ता है और पार्टी असहज स्थिति में आती है, तो वह अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं।
गोदियाल ने कहा कि हरीश रावत जीवनभर कांग्रेसी रहे हैं और आगे भी कांग्रेस के साथ रहेंगे।
‘ED को कुछ नहीं मिला, जांच का विषय है’
चंदन सिंह जीना के आवास से बरामदगी को लेकर पूछे गए सवाल पर गोदियाल ने कहा कि उन्हें मिली जानकारी के अनुसार ED को ऐसी कोई बड़ी बरामदगी नहीं हुई, जिसकी चर्चा की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी सेवा में रहे व्यक्ति के पास कुछ तोला सोने के आभूषण मिलते हैं, तो इसे अपने आप में असाधारण बरामदगी नहीं कहा जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि इस संबंध में वास्तविक तथ्य जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।
गोदियाल ने एक बार फिर आरोप लगाया कि कार्रवाई का समय चुनाव से पहले होना इसे राजनीतिक नजरिए से देखने का आधार देता है।
करण मेहरा बोले- ‘हरीश रावत इतने कमजोर नहीं कि झूठे आरोपों से झुक जाएं’
पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण मेहरा ने भी ED की कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हरीश रावत इतने कमजोर नहीं हैं कि झूठे आरोप लगाकर उन्हें दबाया या झुकाया जा सके। मेहरा ने कहा कि रावत इस्तीफा नहीं दे रहे हैं और इस मामले में लड़ाई जारी रखेंगे।
चंदन सिंह जीना पर लगे आरोपों का जिक्र करते हुए मेहरा ने कहा कि मामला वर्ष 2016 का है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दस साल बाद ED को इस मामले की याद क्यों आई। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि संबंधित संपत्ति या रकम इतनी पुरानी थी तो इतने वर्षों तक वह कैसे सुरक्षित रही।
मेहरा ने कहा कि चंदन सिंह जीना ने लंबे समय तक सरकारी नौकरी की है। ऐसे में उनकी वैध आय और वर्षों की सेवा को देखते हुए संपत्ति का आकलन भी उसी संदर्भ में किया जाना चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि चंदन सिंह जीना को फंसाने के लिए कुछ सामग्री प्लांट किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
हरीश रावत ने कांग्रेस से इस्तीफे की खबरों का किया खंडन
इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस से इस्तीफा देने की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी की सदस्यता उनके लिए जीवनभर का संबंध है और वह पार्टी से अलग होने की बात नहीं कर रहे हैं।
रावत ने स्पष्ट किया कि देहरादून में ED की कार्रवाई को लेकर उन्होंने यह जरूर कहा था कि यदि इस कार्रवाई से कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के नैरेटिव पर कोई असर पड़ता है और इससे पार्टी असहज स्थिति में आती है, तो वह अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उनके पास प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य और AICC की वर्किंग कमेटी के सदस्य के तौर पर जो पद हैं, आवश्यकता पड़ने पर वह उन पदों से त्यागपत्र देने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस पार्टी की सदस्यता छोड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है।
ED की कार्रवाई और उससे जुड़े आरोपों पर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस इसे चुनाव से पहले की गई राजनीतिक कार्रवाई बता रही है, वहीं मामले की जांच के बाद ही आरोपों और बरामदगी से जुड़े तथ्यों की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।


