Close Menu
Aarogya GangaAarogya Ganga
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp Telegram
    ब्रेकिंग न्यूज़ -
    • BTIndia@100 में धामी का बड़ा ऐलान: उत्तराखंड बनेगा देश की औद्योगिक ग्रोथ का नया इंजन, मारुति-हुंडई को निवेश का न्योता
    • पटेलनगर में फायरिंग और मारपीट मामले में चार गिरफ्तार
    • निजी कॉलेजों के लंबित संबद्धता विस्तार प्रकरण का मामला राजभवन पहुंचा
    • पुलिस लाइन देहरादून में खनकी चूड़ियां, झूले पर सजी तीज की मस्ती; सुनीता बनीं ‘तीज क्वीन’
    • 3rd International Smart & Future Cities Conclave 2026 में ‘Evolving Uttarakhand – Rising India’ थीम पर वैश्विक मंथन
    • SIR पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मिला प्रतिनिधिमंडल
    • # काशीपुर में 18 वर्षीय छात्रा का शव मिलने से सनसनी, हत्या की आशंका
    • सरकार के विकास मॉडल पर सवाल: जीवितों के लिए सड़क नहीं, मृतकों के लिए मोक्ष धाम तक रास्ता नहीं — आर्येंद्र शर्मा
    • मालदेवता में सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार से मचाई धूम
    • मुख्यमंत्री धामी बोले सरकार महिला, युवा और ग्रामीण उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित
    Friday, August 21
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp Telegram
    Aarogya GangaAarogya Ganga
    Demo
    • होम
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • राष्ट्रीय
    • अंतर्राष्ट्रीय
    • खेल
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
    • व्यापार
    • मनोरंजन
    • अपराध
    Login
    Aarogya GangaAarogya Ganga
    Home»उत्तराखंड»सैफ्रन सर्ज: संघ की 100 साल की यात्रा, संघर्ष और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दस्तावेज
    उत्तराखंड देहरादून

    सैफ्रन सर्ज: संघ की 100 साल की यात्रा, संघर्ष और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दस्तावेज

    Aarogya GangaBy Aarogya GangaAugust 20, 2026No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp

    ‘सैफ्रन सर्ज’ संघर्ष, सेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दस्तावेज: डॉ शैलेंद्र

    -संघ के संगठनात्मक विस्तार से सांस्कृतिक चेतना तक की यात्रा को सामने लाती है ‘सैफ्रन सर्ज’: डॉ शैलेंद्र

    -सेवा, सामाजिक जागरण और भारतीय ज्ञान परंपरा का दस्तावेज है ‘सैफ्रन सर्ज’

    -राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के विभिन्न पहलुओं को समेटती है ‘सैफ्रन सर्ज’

    देहरादून, 20 अगस्त। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) उत्तराखंड के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने कहा कि ‘सैफ्रन सर्ज’ में संघ की संगठनात्मक यात्रा, संघर्ष, सेवा गतिविधियों और भारतीय सांस्कृतिक चेतना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि पुस्तक संघ के सामाजिक विस्तार से लेकर भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक के विभिन्न पक्षों को समझने का प्रयास करती है।

    डॉ. शैलेंद्र गुरुवार को सर्वे चौक स्थित आईआरडीटी सभागार में ‘सैफ्रन सर्ज’ के विमोचन समारोह को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। करीब 299 पृष्ठों की पुस्तक में हिंदुत्व, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक परिवर्तन और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े प्रसंगों के साथ विभिन्न ऐतिहासिक एवं समकालीन व्यक्तित्वों के योगदान का उल्लेख किया गया है।

    डॉ. शैलेंद्र ने पुस्तक के उन अध्यायों का उल्लेख किया, जिनमें बंगाल और पूर्वोत्तर भारत में संघ के संगठनात्मक प्रयासों को रेखांकित किया गया है। उन्होंने असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिजोरम सहित विभिन्न क्षेत्रों में संघ से जुड़े संगठनों की सेवा गतिविधियों का उल्लेख किया। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से राहत एवं सेवा कार्य किए जाने की बात भी उन्होंने कही।

    उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरण से जुड़े कार्यों तथा वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं की गतिविधियों का भी उल्लेख किया। असम में कार्यकर्ताओं के अपहरण और हत्या तथा ओडिशा में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद सेवा और सामाजिक गतिविधियां जारी रहीं।

    उन्होंने रामसेतु आंदोलन, प्रयागराज कुंभ और कांवड़ यात्रा के दौरान संचालित सेवा गतिविधियों की चर्चा करते हुए कहा कि नेत्र कुंभ, पर्यावरण संरक्षण, समरसता कुंभ और युवा कुंभ जैसे आयोजनों के माध्यम से धार्मिक आयोजनों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। संघ और उससे जुड़े संगठनों द्वारा देशभर में दो लाख से अधिक सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सेवा गतिविधियां संघ के लिए नई नहीं हैं और भविष्य में इन्हें और व्यापक बनाने की आवश्यकता है।

    डॉ. शैलेंद्र ने संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए नालंदा, तक्षशिला, विक्रमशिला, उज्जैन और कांची जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों को भारत की बौद्धिक विरासत का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भाषा, शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।

    उन्होंने भारतीय मूल के लोगों की वैश्विक भूमिका और वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृति और विचारों पर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चर्चा का उल्लेख किया। उन्होंने युवा शक्ति, मातृशक्ति, संत समाज और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    अपनी सभ्यतागत जड़ों से जुड़ना जरूरी : अनिल रतूड़ी

    कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी ने कहा कि भारत की सभ्यतागत अस्मिता को समझने और मजबूत करने के लिए भाषा, संस्कृति, ज्ञान परंपरा और मूल विचारों से जुड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज के पुनर्जागरण में विचारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

    उन्होंने पुस्तक में भारत की दीर्घ सभ्यतागत यात्रा के विभिन्न पड़ावों को सामने रखे जाने की बात कही। बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य और सिलिगुड़ी कॉरिडोर के सामरिक महत्व का भी उन्होंने उल्लेख किया।

    अनिल रतूड़ी ने संस्कृत को भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्वपूर्ण भाषा बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक परिस्थितियों और औपनिवेशिक शिक्षा व्यवस्था के प्रभाव से समाज का एक वर्ग अपनी पारंपरिक भाषाओं और ज्ञान परंपरा से दूर हुआ। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राजनीतिक आजादी के साथ सांस्कृतिक और मानसिक स्तर पर औपनिवेशिक प्रभावों को समझना भी आवश्यक है।

    उन्होंने हिंदुत्व को केवल कर्मकांड तक सीमित करके नहीं देखने की बात कही और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे व्यापक मानवीय मूल्यों का उल्लेख किया। उन्होंने नई पीढ़ी से भारतीय सभ्यतागत विरासत और उसके मूल विचारों को समझने का आह्वान किया।

    पुस्तकों के माध्यम से राष्ट्रवादी विचार एवं राष्ट्रीय चेतना नई पीढ़ी तक पहुंचेगी: महेंद्र भट्ट

    कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने कहा कि भारत में पूजा-पद्धतियां, भाषाएं, बोलियां, पहनावे और खान-पान अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन देश के प्रति साझा भावना समाज को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि भारत के मानबिंदुओं को प्रतिष्ठित करने का कार्य हो रहा है और पुस्तकों के माध्यम से राष्ट्रवादी विचार एवं राष्ट्रीय चेतना नई पीढ़ी तक पहुंचाई जा सकती है।

    पुस्तक विचारों को दिशा देती है : नरेश बंसल

    विशेष मान्य अतिथि व राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि पुस्तक केवल पढ़कर अलमारी में रखने की वस्तु नहीं होती, बल्कि वह विचारों को दिशा देने और व्यक्ति को किसी उद्देश्य के प्रति प्रेरित करने का माध्यम बनती है। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में प्रकाशित ‘सैफ्रन सर्ज’ से संघ की सौ वर्ष की यात्रा और इस दौरान हुए सामाजिक-सांस्कृतिक बदलावों को समझने का अवसर मिलेगा।

    बंसल ने पुस्तक का हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किए जाने की आवश्यकता बताई और लेखक तरुण विजय से क्षेत्रीय भाषाओं में इसके संस्करण उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

    ‘सैफ्रन सर्ज’ सांस्कृतिक चेतना में बदलाव का संकेत : तरुण विजय

    पुस्तक के लेखक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने कहा कि ‘सैफ्रन सर्ज’ आरएसएस, हिंदुत्व और हिंदू सांस्कृतिक चेतना के बढ़ते प्रभाव को समझने का प्रयास है। उन्होंने संघ स्वयंसेवकों के संघर्ष और बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद अनेक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों ने अपने सामाजिक एवं वैचारिक कार्य जारी रखे।

    उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं, धार्मिक प्रतीकों और औपनिवेशिक दौर से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए अपने वैचारिक दृष्टिकोण को सामने रखा। उन्होंने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य भारतीय सभ्यता, परंपरा और राष्ट्रीय चेतना के संदर्भ में बदलते सामाजिक परिदृश्य को सामने रखना है।

    कार्यक्रम में वक्ताओं ने ‘सैफ्रन सर्ज’ को संघ के संगठनात्मक विस्तार, सेवा कार्यों, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक बदलाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने का एक प्रयास बताया। कार्यक्रम का समापन भारत की सांस्कृतिक भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए ‘भारत माता की जय’ के उद्घोष के साथ हुआ।

    कार्यक्रम के संयोजक एवं मुख्यमंत्री के जनसम्पर्क अधिकारी राजेश सेठी ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए युवाओं से ‘सैफ्रन सर्ज’ पुस्तक में निहित राष्ट्रीय भाव और विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक युवाओं को राष्ट्र, संस्कृति और समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देती है। मांचीसन अतिथियों में प्रकाशक आलोक गोस्वामी उपस्थित रहे और कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र खंडूडी ने किया।

    इस मौके पर क्षेत्र प्रचार प्रमुख तपन, प्रांत व्यवस्था प्रमुख नीरज मित्तल, विभाग प्रचारक धनंजय, विभाग कार्यवाह रविंद्र चौहान, अरुण शर्मा, मनीष बागड़ी सहित बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp
    Aarogya Ganga
    • Website

    Related Posts

    BTIndia@100 में धामी का बड़ा ऐलान: उत्तराखंड बनेगा देश की औद्योगिक ग्रोथ का नया इंजन, मारुति-हुंडई को निवेश का न्योता

    August 21, 2026
    Read More

    पटेलनगर में फायरिंग और मारपीट मामले में चार गिरफ्तार

    August 21, 2026
    Read More

    निजी कॉलेजों के लंबित संबद्धता विस्तार प्रकरण का मामला राजभवन पहुंचा

    August 21, 2026
    Read More
    Leave A Reply Cancel Reply

    Top Posts

    देहरादून: शिक्षक संघ की गोष्ठी में नई कार्यकारिणी का अभिनंदन

    May 18, 2026291

    मानसिक-शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए जरूरी हैं यह उपाय!

    September 6, 202588

    मानव उत्थान सेवा समिति ने चलाया सफाई अभियान

    September 27, 202578

    केदारनाथ सोना विवाद: गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आई सामने, हुए बड़े खुलासे

    September 23, 202570
    Weather

    Aarogya Ganga is a National Hindi News Magazine. Launched in 2006, and we focuses on delivering around the clock Different variety news analysis, Agriculture, Education, Business, Entertainment, Art-Literature-Culture and Media etc.

    Editor: Sarojani Saklani
    Address: Lane No-6, A-Block, Shiv Ganga Enclave, Danda Lakhond, Sahastradhara Road, Gujrara, Dehradun, Uttarakhand, India 248001
    Email Us: aarogyaganga@gmail.com

    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube WhatsApp
    Our Picks

    BTIndia@100 में धामी का बड़ा ऐलान: उत्तराखंड बनेगा देश की औद्योगिक ग्रोथ का नया इंजन, मारुति-हुंडई को निवेश का न्योता

    August 21, 2026

    पटेलनगर में फायरिंग और मारपीट मामले में चार गिरफ्तार

    August 21, 2026

    निजी कॉलेजों के लंबित संबद्धता विस्तार प्रकरण का मामला राजभवन पहुंचा

    August 21, 2026
    Most Popular

    देहरादून: शिक्षक संघ की गोष्ठी में नई कार्यकारिणी का अभिनंदन

    May 18, 2026291

    मानव उत्थान सेवा समिति ने चलाया सफाई अभियान

    September 27, 202578

    केदारनाथ सोना विवाद: गढ़वाल कमिश्नर की जांच रिपोर्ट आई सामने, हुए बड़े खुलासे

    September 23, 202570
    © 2026 Aarogya Ganga. All rights reserved.
    • होम
    • About Us
    • Contact Us
    • Privacy Policy
    • Terms and Conditions
    • Disclaimer

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Sign In or Register

    Welcome Back!

    Login to your account below.

    Lost password?